गंदे और बुरे विचार
एक दिन की बात है एक मास्टरजी अपने एक अनुयायी के साथ प्रात : काल सैर कर रहे थे
अचानक ही एक व्यक्ति उसके पास आया उन्हें भला -बुरा कहने लगा।
उसने पहले मास्टर के लिए से अपशब्द कहें , पर बावजूद इसके मास्टर मुस्कुराते हुए चलते रहे। मास्टर को
ऐसा करता देख वह व्यक्ति और भी क्रोधित हो गया और उनके पूर्वजों तक को अपमानित करने लगा।
पर इसके बावजूद मास्टर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते रहे। मास्टर पर अपनी बातों को कोई असर न होते हुए देख
अतः वह व्यक्ति निराश हो गया और उनके रास्ते से हट गया।
उस व्यक्ति के जाते ही अनुयायी ने आशर्य से पूछा , मास्टर जी आपने भला उस दुष्ट की बातो का जवाब क्यों
नहीं दिया ,और तो और आप मुस्कुराते रहे , क्या आपको उसकी बातो से कोई कष्ट नहीं पहुँचा। ?
मास्टरजी कुछ नहीं बोले और उसे अपने पीछे आने का इशारा किया कुछ देर चलने के बाद वे मास्टरजी के कक्ष
तक पहुँच गए। मास्टर बोले , तुम यही रुको मै अंदर से अभी आया। मास्टरजी कुछ देर बाद एक मैले और गदे
कपड़ों से अजीब सी दुगर्न्ध आ रही थी और अनुयायी ने उन्हें हाथ में लेते ही दूर फेंक दिया
इतना याद रखो की यदि तुम किसी के बिना मतलब भला -बुरा गदे विचार कहने पर स्वय भी क्रोधित हो जाते है
हो जगह उसके फेंके फ़टे -पुराने मैले और गदे कपड़ों की धारण कर रहे हो। इसलिए हमेशा किसी की बुरा
बातों पर धारण कर रहे हो। इसलिए हमेशा किसी की बुरी बातों पर ध्यान न दें शांत रहिए। मास्टरजी बोले ,क्या
हुआ तुम इन मैले कपड़ों को नहीं ग्रहण कर सकते ना ? ठीक इसी तरह मै भी उस व्यक्ति द्वारा फेंके हुए
अपशब्दों को नहीं ग्रहण कर सकता
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